शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ संसारभयतः पातु मृत्योर्मृत्युर्-नृकेसरी
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजीवन-मृत्यु चक्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो मृत्यु के भी मृत्यु हैं, वे नृकेसरी मुझे संसार के जन्म-मरण के भय से बचाएं। (मोक्ष प्रदाता) 38।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शरोद्भूताय नमः
ॐ करवालप्रहारिण्यै नमः
ॐ वन्द्याय नमः
अधो स्वर्णाकर्षण भैरवाय नमः अधो मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः