शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ सुखास्वदायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो परम सुख का आस्वादन कराती हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
इंद्रिय-सुखों से वैराग्य और आत्म-सुख
विस्तृत लाभ
इंद्रिय-सुखों से वैराग्य और आत्म-सुख।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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ॐ मथुरानाथाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ सुनासायै नमः
ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः॥
ॐ अच्युताय नमः
आस्तेऽद्यापि महेन्द्राद्रौ न्यस्तदण्डः प्रशान्तधीः। उपगीयमानचरितः सिद्धगन्धर्वचारणैः॥