शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ सुश्लोकमण्डलाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपउत्तम कीर्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अपने नाम और यश के कारण सर्वत्र पवित्रता फैलाने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यश और कीर्ति-लाभ
विस्तृत लाभ
यश और कीर्ति-लाभ
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ मधुरूपायै नमः
ॐ सर्वमयाय नमः
ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमः
ॐ रामसुग्रीवसन्धात्रे नमः
ॐ करवालप्रियाकन्थायै नमः