शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपप्रदीप्त-गौर-विग्रहे (स्वर्णवर्णी)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
बिजली, स्वर्ण और चंपक के समान प्रदीप्त गौर वर्ण वाली, करोड़ों शरत्कालीन चंद्रमाओं को लजाने वाले मुख वाली राधे, कृपा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लाभ: सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
लाभ: सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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