शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
तुलसी गायत्री मंत्र
ॐ तुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविष्णुप्रिया तुलसी (वनस्पति रूप)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम भगवान विष्णु की प्रिया वृंदा (तुलसी) का ध्यान करते हैं; वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
निस्वार्थ सेवा भाव का उदय और घर में आध्यात्मिक शुद्धता
विस्तृत लाभ
निस्वार्थ सेवा भाव का उदय और घर में आध्यात्मिक शुद्धता 12।
जप काल
प्रातः तुलसी पूजन व जल अर्पण के समय।
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