शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ वामनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवामन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
छोटे पगों से ब्रह्मांड नापकर अहंकार तोड़ने वाले को नमन।
जप काल
गमन (Walking/Moving) करते समय
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
उरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके। राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत्साधकः शतम्॥
ॐ शास्त्रे नमः
ॐ कारणामृतसन्तोषायै नमः
देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्। दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ कंजलोचनाय नमः
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥