शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ वर्णिनें नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपब्रह्मचारी वेश
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो तपस्या के लिए ब्रह्मचारी के वेष (वर्णी) को धारण करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ब्रह्मचर्य
विस्तृत लाभ
ब्रह्मचर्य
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वरपूर्णामृतोदधये नमः
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
ॐ शुद्धाय नमः।
ॐ अग्रगामिने नमः
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणी। द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥