शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ विधये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपविधाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं विधाता (ब्रह्मा) रूप होकर सृष्टि के विधान रचते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भाग्य वृद्धि
विस्तृत लाभ
भाग्य वृद्धि
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नारिकेलानम्र कदली गुड पायस धारिणम् । शरच्चन्द्र वपुषं भजे भक्त गणपतिम् ॥
ॐ यन्त्रकर्तृप्रियङ्कर्यै नमः
ॐ मांसाशिने नमः।
ॐ सुधायै नमः
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥