संकटनाशन स्तोत्र फलश्रुति
विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
इसके पाठ से विद्यार्थी विद्या प्राप्त करता है, धनार्थी धन प्राप्त करता है, पुत्रार्थी पुत्र प्राप्त करता है और मोक्ष की इच्छा रखने वाला परम गति प्राप्त करता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
सकाम अनुष्ठान में सुनिश्चित कामनाओं की पूर्ति
विस्तृत लाभ
सकाम अनुष्ठान में सुनिश्चित कामनाओं की पूर्ति।
जप काल
संकटनाशन गणेश स्तोत्र के पाठ के अंत में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मध्यं पातु हिरण्याक्ष-वक्षःकुक्षिविदारणः
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ पद्ममालाधरायै नमः
ॐ कृष्णप्रेमवतीकर्त्र्यै नमः
ॐ नादान्ताय नमः
ॐ दान्ताय नमः