चतुरक्षर वाग्भव कमला
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
'ऐं' (सरस्वती), 'श्रीं' (लक्ष्मी), 'ह्रीं' (माया), 'क्लीं' (काम) शक्तियों को नमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक्-सिद्धि, ज्ञान के साथ अपार ऐश्वर्य
विस्तृत लाभ
वाक्-सिद्धि, ज्ञान के साथ अपार ऐश्वर्य।
जप काल
वसंत पंचमी पर सरस्वती-लक्ष्मी संयुक्त कृपा हेतु।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कल्पलतायै नमः
ॐ कोमलाङ्ग्यै नमः
ॐ रुद्राय रोगनाशाय आगच्छ च राम् ॐ नमः
ॐ दुरन्ताय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ परमात्मने नमः