शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवन-विध्वंसक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रावण की अशोक वाटिका को नष्ट-भ्रष्ट करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सनातनाय नमः
सुवर्णमालिकाञ्चितत्रिरेखकम्बुकण्ठगे त्रिसूत्रमङ्गलीगुणत्रिरत्नदीप्तिदीधिते। सलोलनीलकुन्तलप्रसूनगुच्छगुम्फिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ ऐं नमः शारदे श्रीं शुद्धे नमः शारदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ महाविष्णुर्-दक्षिणे तु महाज्वालस्तु नैरृतौ
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।