शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ अव्ययाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअविनाशी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका कभी विनाश, ह्रास या स्वरूप-परिवर्तन नहीं होता।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्थिरता
विस्तृत लाभ
स्थिरता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कदल्यै नमः
ॐ भायभूतापिशचघ्नाय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ सालग्रामनिवासाय नमः
ज्ञात्वा शिवं शान्तिमत्यन्तमेति
ॐ राधाकृष्णभ्यां नमः