शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ दुर्गमेश्वर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी दुर्गम सत्ताओं और ब्रह्मांड की ईश्वरी हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पुण्यात्मने नमः
ॐ गदाधराय नमः
ॐ शिं रैं स्वतन्त्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्यां नमः
अशोकवृक्षवल्लरीवितानमण्डपस्थिते प्रवालबालपल्लवप्रभारुणाङ्घ्रिकोमले। वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ देव्यै नमः
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥