शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ जगच्चक्राय स्वाहा – शिखायै वषट्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिखा-न्यास / जगच्चक्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जगत-चक्र को स्वाहा, वे मेरी शिखा में स्थित हों। (ब्रह्मरंध्र की ऊर्जा का संरक्षण)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ रविकोट्युदयप्रभाय नमः
ॐ कमलासनस्थायै नमः
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः।
जो पापों का हरण करने वाले साक्षात् भगवान हरि (विष्णु) स्वरूप हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: पाप-नाश) 19।
ॐ सत्याय नमः
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥