शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर् यादोगणेभ्यो वरुणस्य पाशात्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनारायण कवच रक्षा-मंत्र
स्वरूपमत्स्य अवतार
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भगवान का मत्स्य अवतार जल-जंतुओं और वरुण के पाश से जल के भीतर मेरी रक्षा करे।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जल-मार्ग में यात्रा करते समय जल-जंतुओं और डूबने के भय से पूर्ण रक्षा
विस्तृत लाभ
जल-मार्ग में यात्रा करते समय जल-जंतुओं और डूबने के भय से पूर्ण रक्षा 61।
जप काल
जल यात्रा से पूर्व या संकट के समय।
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