शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिर-न्यास / ज्वालाचक्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ज्वाला-चक्र को स्वाहा, वे मेरे सिर पर स्थापित हों। (विचारों को नकारात्मकता से बचाना)।
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ॐ गजाननाय नमः
न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतक्लेशनाशाय
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥ 16
ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
लक्ष्मीर्हरिप्रिया पद्मा एतन्नामत्रयं स्मरन्। सर्वान्कामानवाप्नोति सत्यं सत्यं हि पद्मज॥