शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ पञ्चाननाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपञ्चमुख नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके पांच मुख हैं (दसों दिशाओं के रक्षक), उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दसों दिशाओं और पांचों तत्त्वों से पूर्ण रक्षण
02
तंत्र विद्या में विशेष सिद्धि
विस्तृत लाभ
दसों दिशाओं और पांचों तत्त्वों से पूर्ण रक्षण; तंत्र विद्या में विशेष सिद्धि।
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ॐ दिव्याभरणशोभिने नमः।
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8
कल्हार शालि कमलेक्षुक चाप बाण दन्तप्ररोहक गदी कनकोज्ज्वलाङ्गः । आलिङ्गनोद्यतकरो हरिताङ्गयष्ट्या देव्या दिशत्वभयम् ऊर्ध्वगणाधिपो मे ॥
ॐ ऋषिप्रवरवन्द्याय नमः
ॐ धनधान्यकर्यै नमः
ॐ महानन्दिने नमः