शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविष्णु स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने वामन रूप में तीन पगों से ब्रह्मांड नापा था, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
रुके हुए व्यापार में विस्तार और कार्यक्षेत्र में तीव्र पदोन्नति
विस्तृत लाभ
रुके हुए व्यापार में विस्तार और कार्यक्षेत्र में तीव्र पदोन्नति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ प्राणशक्त्यै नमः
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥
ॐ नमो बजर का कोठा, जिस पर पिंड हमारा पेठा। ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों धाम का यती हनुमंत रखवाला।
ॐ श्रीकृष्णमहिष्यै नमः
ॐ कारणानन्दजापेष्टायै नमः
ॐ वटवे नमः