श्रीराम मंत्र
ॐ कक्षौ श्रीकान्तवल्लभा पातु।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
श्रीकांत (कृष्ण) की वल्लभा मेरे कक्षों की रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
अंग: कक्ष (बगल/Waist) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: कक्ष (बगल/Waist) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्लीं वीं रूं ध्रूं घ्नीं ह्रीं बटुक भैरवाय नमः स्वाहा।
ॐ वाणीश्वर्यै नमः
ॐ अजाय नमः
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ब्रह्माण्डातीतपरमपुरुषः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः