शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ कण्ठं पातु हरिप्रिया।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपहरिप्रिया
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हरिप्रिया मेरे कण्ठ की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: कण्ठ (गले) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: कण्ठ (गले) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
ॐ वरदाय नमः
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भगवान्विष्णुः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ अधोक्षजाय नमः
ॐ शक्तिधराय नमः