श्री नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम उन भगवान का स्मरण करते हैं जिनके नख वज्र के समान हैं, हम उन तीक्ष्ण दांतों वाले देव का ध्यान करते हैं। वे नरसिंह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
आध्यात्मिक जागरण, बुद्धि की प्रखरता, इन्द्रिय निग्रह और सांसारिक दुविधाओं से पूर्ण मुक्ति
विस्तृत लाभ
आध्यात्मिक जागरण, बुद्धि की प्रखरता, इन्द्रिय निग्रह और सांसारिक दुविधाओं से पूर्ण मुक्ति।
जप काल
ब्रह्म मुहूर्त में स्फटिक या तुलसी माला से 108 बार जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये साक्षान्मृत्युः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ गोलोकधामिन्यै राधायै नमः
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्॥
ॐ भर्त्रे नमः