शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ संसारभयतः पातु मृत्योर्मृत्युर्-नृकेसरी
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजीवन-मृत्यु चक्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो मृत्यु के भी मृत्यु हैं, वे नृकेसरी मुझे संसार के जन्म-मरण के भय से बचाएं। (मोक्ष प्रदाता) 38।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
पवन तनय बल पवन समाना। (यह हनुमान जी की शक्ति का आह्वान कर न्याय प्राप्त करने हेतु है)।
ॐ नगभेदिनें नमः
ॐ रामदूताय नमः
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥