कृष्णाय वासुदेवाय देवकीनन्दनाय च । नन्दगोपकुमाराय गोविन्दाय नमो नमः ॥
कृष्णाय वासुदेवाय देवकीनन्दनाय च । नन्दगोपकुमाराय गोविन्दाय नमो नमः ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
वासुदेव-पुत्र, देवकीनन्दन, नन्द-गोप के कुमार, भगवान गोविन्द (कृष्ण) को मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ 36।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान की निरन्तर कृपा प्राप्ति, वात्सल्य और भक्ति-भाव की वृद्धि
विस्तृत लाभ
भगवान की निरन्तर कृपा प्राप्ति, वात्सल्य और भक्ति-भाव की वृद्धि 36।
जप काल
भगवान के दर्शन, पूजा-आरती या नैवेद्य अर्पण के समय इसे स्तुति रूप में गाया जाता है 37।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः
आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥
ॐ दुर्गायै नमः
ॐ वायुपुत्राय नमः
जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर अश्वमेध यज्ञ में महर्षि कश्यप को दान कर दिया, उन पृथ्वी-पति को नमस्कार। (लाभ: संपत्ति एवं राज्याधिकार की प्राप्ति) 19।
ॐ त्रयीमूर्तये नमः