शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये जनकनन्दिनी तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारऔपनिषदिक ध्यान मंत्र।
स्वरूपजनक-नंदिनी (सीता) स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं माता सीता (प्रकृति) के स्वरूप हैं, उन राम को नमन।
जप काल
ध्यान-साधना, मोक्ष-कामना हेतु एकांत में मानसिक जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
ॐ श्रीं ह्रीं ह्स्सौः हूँ फट् नील सरस्वत्यै स्वाहा।
वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि॥
ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः
ॐ कृष्णप्रेमवतीकर्त्र्यै नमः
ॐ कमण्डलुधराय नमः