शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ शान्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपशांत-चित्त
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मानसिक शांति और अगाध स्थिरता से परिपूर्ण भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय मम पूर्ण तंत्र सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय।
ॐ महानन्दाय नमः
ॐ इच्छामय्यै नमः
ॐ चुं चण्डीश्वराय तेजस्याय चुं ॐ फट्
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ नागाशनरथस्थिताय नमः