शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
षडक्षर मूल मंत्र
ॐ शरवणभवाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारउपासना मंत्र
स्वरूपसरवनभव / मुरुगन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शरवण (सरकंडों के वन) में उत्पन्न होने वाले भगवान सुब्रह्मण्य को मेरा नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान नाश, भयमुक्ति, सर्वबाधा निवारण
विस्तृत लाभ
अज्ञान नाश, भयमुक्ति, सर्वबाधा निवारण।
जप काल
मंगलवार या षष्ठी को स्फटिक माला से 108 जप।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जो माता एकवीरा (रेणुका का एक नाम) के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: माता की असीम कृपा) 19।
ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ओङ्कारः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ योगबद्धायै नमः
ॐ लङ्कापुरविदाहकाय नमः
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥