शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ श्रीमती नेत्रयुगलं पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपश्रीमती
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीमती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: दोनों नेत्रों की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: दोनों नेत्रों की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ योगिकाम्यप्रदात्र्यै नमः
ॐ रक्तपाय नमः।
ॐ विद्यायै नमः
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ शचीमाङ्गल्यरक्षकाय नमः
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।