शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ वाचं वाणी सदा पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपवाणी (सरस्वती स्वरूपा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देवी सरस्वती मेरी वाणी की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: वाणी (Speech) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: वाणी (Speech) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुखिने नमः
ॐ शम्भवे नमः
अधरौष्ठं हृषीकेशो दन्तपंक्तिं गदाग्रजः । रासेश्वरश्च रसनां तालुकं वामनो विभुः ॥
ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः॥
रहस्यमपि हि ब्रूयुर्लोकैकहितदृष्टयः। शिव उवाच- धर्मार्थकाममोक्षाणामनायासं सुसिद्धिदम्॥
स ब्रह्मा स शिवः स इन्द्रः सोऽक्षरः परमः स्वराट्। स एव विष्णुः स प्राणः स कालोऽग्निः स चन्द्रमाः॥