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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्रीधर स्वामी कृत नृसिंह वंदना

वागीशा यस्य वदने लक्ष्मीर्यस्य च वक्षसि। यस्यास्ते हृदये संवित् तं नृसिंहमहं भजे॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तुति मंत्र
स्वरूपज्ञान एवं ऐश्वर्य स्वरूप नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिनके मुख में वागीश्वरी (सरस्वती), वक्ष पर लक्ष्मी और हृदय में पूर्ण ज्ञान (संवित) का निवास है, उन नरसिंह भगवान का मैं भजन करता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

विद्या, वाक्-सिद्धि और धन-संपदा की एक साथ प्राप्ति

02

पूर्ण ज्ञान का उदय

विस्तृत लाभ

विद्या, वाक्-सिद्धि और धन-संपदा की एक साथ प्राप्ति। पूर्ण ज्ञान का उदय।

जप काल

विद्यारंभ के समय या नित्य अध्ययन से पूर्व।

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