शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ वासुदेवाय वन्द्याय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसर्वत्र रक्षा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वंदनीय वासुदेव को नमस्कार।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
ॐ कलावत्यै नमः
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥ 16
ॐ शर्वरीप्रियकारकाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ वृषभारूढाय नमः