शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सर्व-मनोकामना व रोग मुक्ति हेतु मंत्र
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसम्पुट मंत्र / काम्य उपासना मंत्र।
स्वरूपत्रिशिरा-शत्रु राम (रोग व दोष नाशक)।
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रघुकुलनाथ का यश जन्म-मरण रूपी रोग की अचूक औषधि है। जो इसे सुनते हैं, त्रिशिरा के शत्रु (राम) उनके सभी मनोरथ सिद्ध करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
असाध्य रोगों से मुक्ति (भव भेषज) और सभी लौकिक-अलौकिक इच्छाओं की पूर्ति
विस्तृत लाभ
असाध्य रोगों से मुक्ति (भव भेषज) और सभी लौकिक-अलौकिक इच्छाओं की पूर्ति 11।
जप काल
अनुष्ठान के रूप में, दीपक प्रज्वलित कर रुद्राक्ष या तुलसी की माला से।
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