शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ आदिरूपायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो चराचर जगत का मूल (आदि) स्वरूप हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन के मूल सत्य का ज्ञान
विस्तृत लाभ
जीवन के मूल सत्य का ज्ञान।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
दयासुदृष्टिं कुरुतां मयि श्रीः! सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्रीः॥
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ 17
ॐ कुहूभर्त्रे नमः
ॐ कच्छपेशाय विद्महे महाकूर्माय धीमहि तन्नो कूर्मः प्रचोदयात्।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवीसरस्वती तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः