ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ सरस्वती मंत्र

अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारव्यापकता मंत्र
स्वरूपसर्वव्यापी / अंतर्यामी नारायण
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

इस ब्रह्मांड में भीतर और बाहर जो कुछ भी है, नारायण उस सबको व्याप्त करके स्थित हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सर्वत्र ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव और मन की असीम शुद्धि

विस्तृत लाभ

सर्वत्र ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव और मन की असीम शुद्धि 2।

जप काल

नित्य पूजा या संध्यावंदन के दौरान।

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ॐ गन्धर्वविद्यातत्त्वज्ञाय नमः

मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥

ॐ महादेवाय नमः

वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥

जो दुष्टों के दमन हेतु भयंकर परशु (फरसा) धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: शत्रुओं से रक्षा) 19।