अथर्वशीर्ष शांति पाठ
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायुः ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे देवगण, हम अपने कानों से कल्याणकारी वचन सुनें, आंखों से कल्याणकारी दृश्य देखें, और सुदृढ़ अंगों से स्तुति करते हुए ईश्वर द्वारा प्रदत्त आयु का उपभोग करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
शारीरिक स्वास्थ्य, लंबी आयु और सकारात्मक ऊर्जा का संचार
विस्तृत लाभ
शारीरिक स्वास्थ्य, लंबी आयु और सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
जप काल
अथर्वशीर्ष के मुख्य पाठ से पूर्व स्वस्तिवाचन के रूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अन्तश्चेतनात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कुमाराय नमः
ॐ घोरविक्रमाय नमः