शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अथर्वशीर्ष ओंकार शिव मंत्र
ब्रह्मासि रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारओंकार / सर्वव्यापकता मंत्र
स्वरूपओंकार रूपी शिव/गणपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे प्रभु! तुम ही ब्रह्मा हो, तुम ही रुद्र हो, तुम ही इंद्र, अग्नि, वायु, सूर्य और चंद्रमा हो। तुम ही भूर्भुवः स्वः और ॐ हो 55।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भटकाव से मुक्ति और आत्मा में शिव का साक्षात्कार
विस्तृत लाभ
भटकाव से मुक्ति और आत्मा में शिव का साक्षात्कार 55।
जप काल
ओंकार ध्यान के समय।
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