शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ चतुर्बाहवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपचतुर्भुज स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चार भुजाएं धारण करने वाले विशिष्ट तांत्रिक स्वरूप वाले भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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ॐ त्रिलोकात्मने नमः
ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम्
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
अयं यः सृञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते । द्युमाँ अमित्रदम्भनः ॥
ॐ अन्नपूर्णायै नमः