शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाद्यायुधाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपचतुर्भुज नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और असि (खड्ग) धारण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भय नाश (कवच रूप)
विस्तृत लाभ
भय नाश (कवच रूप)
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
पाशाङ्कुशौ दन्त जम्बू दधानः स्फटिकप्रभः । रक्तांशुकः गणपतिः मुदे स्याद् ऋणमोचकः ॥
ॐ कारागृहविमोक्त्रे नमः
ॐ स्वाहायै नमः
ॐ शक्तिधराय नमः
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः।