राम गायत्री मंत्र
ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम दशरथपुत्र श्रीराम को जानते हैं, उन सीता-वल्लभ का हम ध्यान करते हैं। वे श्रीराम हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
बुद्धि की शुद्धि, मानसिक स्पष्टता, धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा (तेज) में अपार वृद्धि
विस्तृत लाभ
बुद्धि की शुद्धि, मानसिक स्पष्टता, धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा (तेज) में अपार वृद्धि 7।
जप काल
प्रातःकाल सूर्योदय के समय, संध्यावंदन के अंतर्गत।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ सुमुखाय नमः
ॐ सत्यसन्धाय नमः
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
ॐ अनन्तशक्तये नमः
ॐ रासेश्वर्यै नमः