शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 5
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
धर्म के रक्षक और कर्म के बंधनों से मुक्त करने वाले विभु का भजन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अधर्म के मार्ग से रक्षा और कर्म के बंधनों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
अधर्म के मार्ग से रक्षा और कर्म के बंधनों से मुक्ति।
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