गौतमीय तंत्र युगल ध्यान मंत्र
दिव्याद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीश्रीराधाश्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं अलौकिक वृंदावन के कल्पवृक्ष के नीचे, रत्नों के भव्य सिंहासन पर विराजमान, अपनी प्रिय सखियों (गोपियों) द्वारा सेवित श्री राधा और गोविन्द देव का स्मरण करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
ध्यान की असीम गहराई, चंचल मन की एकाग्रता और निकुंज दर्शन की योग्यता
विस्तृत लाभ
ध्यान की असीम गहराई, चंचल मन की एकाग्रता और निकुंज दर्शन की योग्यता 31।
जप काल
मानसी सेवा, अष्टकालीय लीला स्मरण और रूप-ध्यान के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ लक्ष्याय नमः।
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
आस्तेऽद्यापि महेन्द्राद्रौ न्यस्तदण्डः प्रशान्तधीः। उपगीयमानचरितः सिद्धगन्धर्वचारणैः॥
हरि राम हरि राम, राम राम हरि हरि (Hari Ram Hari Ram, Rama Rama Hari Hari)
ॐ विधात्रे नमः
ॐ वेदवेद्याय नमः