शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ दृप्तवक्त्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपउग्र मुख
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका मुख अत्यंत तेज और ईश्वरीय गर्व से उद्भासित है, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
चेहरे पर ओज (Aura) की वृद्धि
02
जिससे समाज में सम्मान और दबदबा स्थापित हो
विस्तृत लाभ
चेहरे पर ओज (Aura) की वृद्धि; जिससे समाज में सम्मान और दबदबा स्थापित हो।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कर्णयुग्मं च कण्ठं च कपालं पातु माधवः । कपोलं पातु गोविन्दः केशांश्च केशवः स्वयम् ॥
ॐ कमलाननायै नमः
ॐ स्वधायै नमः
ॐ प्रसन्नात्मने नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥