शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
प्रह्लादकृत आत्म-समर्पण मंत्र
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारप्रपत्ति मंत्र
स्वरूपसर्वव्यापी / आदि नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इधर भी नरसिंह हैं, उधर भी नरसिंह हैं। जहाँ-जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ नरसिंह हैं। बाहर नरसिंह हैं, हृदय में भी नरसिंह हैं। उन आदि देव नरसिंह की मैं शरण लेता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अकाल मृत्यु, भय और घोर ऋण-बाधा का निवारण
02
पूर्ण शरणागति की सिद्धि
विस्तृत लाभ
अकाल मृत्यु, भय और घोर ऋण-बाधा का निवारण। पूर्ण शरणागति की सिद्धि।
जप काल
संकट के समय, यात्रा आरंभ करते समय या नित्य शयन से पूर्व मानसिक जप।
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