श्री परशुराम गायत्री मंत्र (द्वितीय पाठ)
ॐ जामदग्नाय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम महर्षि जमदग्नि के पुत्र को जानते हैं, उन महावीर का हम ध्यान करते हैं। वे भगवान परशुराम हमारी चेतना को आलोकित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञात-अज्ञात भय से मुक्ति, ऋण-मुक्ति, और आत्म-विश्वास एवं संकल्प-शक्ति का सुदृढ़ीकरण
विस्तृत लाभ
ज्ञात-अज्ञात भय से मुक्ति, ऋण-मुक्ति, और आत्म-विश्वास एवं संकल्प-शक्ति का सुदृढ़ीकरण।
जप काल
परशुराम जयंती (वैशाख शुक्ल तृतीया) अथवा नित्य प्रातःकाल एकाग्रचित्त होकर।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ह स ख म ल व र यूं आनंद भैरवाय स्वाहा।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गज लक्ष्म्यै नमः।
ॐ माधवप्रियायै नमः
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
पाशाङ्कुशौ दन्त जम्बू दधानः स्फटिकप्रभः । रक्तांशुकः गणपतिः मुदे स्याद् ऋणमोचकः ॥
ॐ हर्त्रे नमः