शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ करौ मे देववरदो नृसिंहः पातु सर्वतः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदोनों हाथ / देव-वरद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देवताओं को वर देने वाले नरसिंह मेरे दोनों हाथों की सब ओर से रक्षा करें। (कर्म-कौशल में वृद्धि)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मणे नमः
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
ॐ सत्यव्रताय नमः
ॐ वराहाय नमः
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ श्रीं महा कालिकायै नमः