श्री दुर्गा गायत्री मंत्र
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम महर्षि कात्यायन की पुत्री माँ दुर्गा को जानते हैं, उन कन्याकुमारी का हम ध्यान करते हैं, वे देवी दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें 27।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान का नाश, उच्च आध्यात्मिक ज्ञान, साहस, और दैवीय मार्गदर्शन की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अज्ञान का नाश, उच्च आध्यात्मिक ज्ञान, साहस, और दैवीय मार्गदर्शन की प्राप्ति 24।
जप काल
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सेतुकृते नमः
देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ नामपारायणप्रियाय नमः
ॐ सिद्धाय नमः।
ॐ कान्तायै नमः
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8