शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपविराट पुरुष
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
करोड़ों सूर्यों के समान कान्ति वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अवसाद एवं अंधकार नाश
विस्तृत लाभ
अवसाद एवं अंधकार नाश
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्व मुखे। हयग्रीवाय सकल जन वशीकरणाय स्वाहा॥
ॐ करप्रियायै नमः
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा दक्षिणे मां सदाऽवतु। (अर्थ: ज्ञानियों की माता दक्षिण दिशा में रक्षा करें) 8
ॐ शरवणभवाय नमः
ॐ कृपानिधये नमः
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥