शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
मदोन्मदातियौवने प्रमोदमानमण्डिते प्रियानुरागरञ्जिते कलाविलासपण्डिते। अनन्यधन्यकुञ्जराज्यकामकेलिकोविदे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपकला-विलास-पंडिते (कलाओं में निपुण)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यौवन से उन्मत्त, प्रियतम के अनुराग में रंजित और कुंज-राज्य की कलाओं में निपुण हे राधे, मुझ पर कृपा-कटाक्ष कब करेंगी?
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लाभ: कला और अनुराग में वृद्धि
विस्तृत लाभ
लाभ: कला और अनुराग में वृद्धि।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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