अग्नि पुराण आधारित गायत्री - 2
ॐ महाज्वालाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम महाज्वाल स्वरूप को जानते हैं, वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वे दन्ती हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान के घोर अंधकार का नाश और आत्मिक तेज की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अज्ञान के घोर अंधकार का नाश और आत्मिक तेज की प्राप्ति।
जप काल
साधना काल में तेजोमय स्वरूप का ध्यान करते हुए।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पूर्वां दिशं कृष्णरता पातु।
ज्ञानशक्तिधरः स्कन्दः वल्लीकल्याणसुन्दरः । देवसेनामनःकान्तः कार्तिकेयो नमोऽस्तु ते ॥
ईशान्यां संहार भैरवाय नमः ईशाने मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् वम् राम् वा ह्रौम् ह्रीम् राम् स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् क्षीम् क्षौम् धुम् हम् ह्लौम् ह्रीम् राम्॥
ॐ कपालिने नमः
ॐ परमात्मने नमः