शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ प्रतापवते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपप्रतापी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका प्रताप तीनों लोकों में सूर्य के समान व्याप्त है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तेजस्विता
विस्तृत लाभ
तेजस्विता
जप काल
नित्य
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं रां रामाय रघुनन्दनाय जानकीवल्लभाय स्वाहा
ॐ रोगनाशनाय नमः
ॐ हृदयं योगिसाध्यश्च निवासं पातु मे हरिः
ॐ हरीश्वराय नमः