परशुराम मूल/बीज मंत्र
ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
'ॐ' और अग्नि-बीज 'रां' से युक्त, जिनके हाथों में परशु (फरसा) सुशोभित है, उन भगवान परशुराम को मेरा नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
उच्च बौद्धिक क्षमता का विकास, शत्रुओं पर अजेय विजय, वाक्-विकारों (वाणी दोष) का शमन और अटूट साहस की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
उच्च बौद्धिक क्षमता का विकास, शत्रुओं पर अजेय विजय, वाक्-विकारों (वाणी दोष) का शमन और अटूट साहस की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकाल, स्नानोपरांत 45 दिनों तक नित्य 108 बार जप। रुद्राक्ष की माला उत्तम है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्मृतसर्वाघनाशनाय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ देवदेविकायै नमः
वासुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं रां श्रीं ॐ राधायै स्वाहा ॐ
ॐ नं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अघोरात्मने मध्यमाभ्यां नमः